अबके हम बिछडे तो.. शायद कभी ख्वाबों में मिले...
जैसे कुछ सूखे फूल किताबों में मिले....
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अब न वो मैं हूँ, न तू हैं, न वो माजी हैं 'फराज' ....
जैसे दो साये, तमन्ना के सराबों में मिले...
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अब ये ठीक नही कि हर दर्द मिटा दे...
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं...
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नही आती उनकी याद तो बरसों तक नही आती...
मगर जब याद आते हैं..तो अक्सर याद आते हैं...

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