Saturday, August 16, 2008

हमें तो तेरा इंतजार करना था....

हमने काटों को भी नरमी से छुआ हैं लेकिन,

लोग बेदर्द हैं, फूलों को भी मसल देते हैं....

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उनकी याद, उनकी तमन्ना, उनका गम॥

कट रही हैं जिंदगी आरामसे....

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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,

न जाने किस गली में जीन्दगी की शाम हो जाय...

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न कोई वादा, न कोई यकीं, न कोई उम्मीद

मगर हमें तो तेरा इंतजार करना था....

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Friday, August 15, 2008

अबके हम बिछडे तो.. शायद कभी ख्वाबों में मिले...

अबके हम बिछडे तो.. शायद कभी ख्वाबों में मिले...
जैसे कुछ सूखे फूल किताबों में मिले....
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अब न वो मैं हूँ, न तू हैं, न वो माजी हैं 'फराज' ....
जैसे दो साये, तमन्ना के सराबों में मिले...

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अब ये ठीक नही कि हर दर्द मिटा दे...
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं...
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नही आती उनकी याद तो बरसों तक नही आती...
मगर जब याद आते हैं..तो अक्सर याद आते हैं...